बाल विकास
.।.प्रस्तावना
बाल्वकाल मानव जीवन की उत्यन्त महत्त्वपूर्ण अवस्था है। वह विकास काल
भावी जीवन की आधारशिला प्रस्तुत करता है। अतः सभी मनोवैज्ञानिकों,
शिक्षाशास्त्रियों तथा दार्शनिकों ने इस अवस्था के महत्त्व को स्वीकार करते हुए । कि 6:
इस बात पर जोर दिया है कि इस आयु में बालक का पालन-पोषण और शिक्षण
इस प्रकार किया जाये कि वह समाज, समुदाय तथा राष्ट्र के उत्तम नागरिक के है
रूप में विकसित हो सके।
फ्रायड के अनुसार-
प्राणी बार, पाँच साल वी उप्र में जो कुछ बनना होला है बर जाला है।
अत्तः फ्रायड के अनुसार भी जीवन की प्रारम्भिक अवस्था महत्त्वपूर्ण
अक्स्था है।
कुछ समय पूर्व तक समाज की यह धारणा थी कि मानव शिशु शारीरिक
रूप से प्रौढ“ों के समान ही होता है, जो कि विकास क्रम में धौरे-थौरे प्रौढो
के रूप में परिवर्तित हो जाता है। व्यक्तियों की इसी धारणा के कारण बाल
विकास तथा बाल मन के अध्ययन की आवश्यकता है। दार्शनिकों के प्रयासों
से धीरे-धीरे काल अध्यदन और बाल विकास के महत्त्व को समझा जाने लगा,
2. जेम्स देवर के अनुसार-
खाल मनौविज्ञन मनौविज्ञन की वह शाखा है, जो प्राणी के विकास कर अध्ययन जन्मसे परिपक्यस्था तक कस्ती है।
उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि बाल मनोविज्ञान बालकों के
व्ववहार के सभी पक्षों का अध्ययन गर्भावस्था से किशोरावस्था
तक वैज्ञानिक तरीकों से करता है, क्योंकि प्राणी का जीवन जन्म से नहीं अपितु
गर्भाधान के समय से ही प्रारम्भ होता है। अतः बाल मनोविज्ञान इसी विकास का
अध्यवन गर्भावस्था से किशोरावस्था तक कर्ता है।
4.3. विकासात्मक मनोविज्ञान
१ साधारणतवा बाल मनोविज्ञान और विकासात्मक मनोविज्ञान को एक है अर्थ
में लिया जाता है, किन्तु दोनों में पर्याप्त अन्तर है। बाल मनोविज्ञान बालक के
विकास का अध्ययन केवल किशोरावस्था तक ही करता है जबकि विकासात्मक
5 मनोविज्ञान अत्वन्त ही! विस्तृत और व्यापक है। यह प्राणी के विकास का
अध्यवन जन्म पूर्व से लेकर जीवन पर्वन्त करता है। विकास एक क्रमिक प्रक्रिया
है, जो जीवन-पर्यन््त किसी न किसी रूप में चलती रहती है।
विकास क्रम में होने वाले परिवर्तन समान नहीं होते हैं। जीवन की
जिसके फलस्वरूप बाल मन तथा बाल विकास के अध्ययन के लिए स्वतनत्र. प्रारम्भिक अवस्था में रचनात्मक परिवर्तन होते हैं, क्योंकि जीवन के पूर्वार्द में
रूप से अलग-अलग शाखाओं का आविर्भाव हुआ, जिन्हें बाल मनोविज्ञान तथा 4 वृद्धि तीढ यति से होती है। जीवन के उत्तरार्ट्र में विनाशात्मक परिवर्तन होता
विकासात्मक मनोविज्ञान के नाम से जाना गया।
।,2.. बाल मनोविज्ञान
बाल मनोविज्ञान दो शब्दों से मिलकर बना है- बाल + मनोविज्ञान। बाल
का अर्थ है बालक अर्थात् वह प्राणी जो प्रौढ़ की श्रेणी में नहीं आया है, उसे
बालक की श्रेणी में रखा जाता है। हम यह भी कह सकते है गर्भावस्था से लेकर
किशोरावस्था तक की आयु के बच्चों को बालकों की श्रेणी में रखा जाता है।
भनोविज्ञान से अभिप्राव मन के विज्ञान से है। अतः काल मनोविज्ञान से तात्पर्य
विज्ञान की उस शाखा से है, जो बालकों के मन (व्यवहारों) का अध्ययन
गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक करती है।
बाल मनोविज्ञान के अर्थ को स्फ्ष्ट करने के लिए विभिन्न मनोवैज्ञानिकों
ने अनेक परिभाषाएँ दी है, उनमें से कुछ परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-
4. क्रो और क्रो के अनुसार-
बात मनोविज्ञन, बह वैज्ञानिक अध्यवन है, जो व्यक्ति के किकतस का अध्यपर
वर्भकाल की फ्रार्तंभक अवस्था से किशोरावस्था तक करता है।
है। रचनात्मक परिवर्तन प्राणी में परिषक्वता लाते हैं और विनाशात्मक परिवर्तन
ब्राणी को वृद्धावस्था की ओर ले जाते हैं। जीवन के उत्तरार्ट में विनाशात्मक
है परिवर्तन होते हैं। बाल मनोविज्ञान केवल बाल्यकाल में होने वाले रचनात्मक
प्रिचर्तनों का ही अध्ययन कर्ता है, जबाकि विकासात्मक मनोविज्ञान एक व्यापक
प्रत्दय है, जो प्राणी के विकास वी विभिन्न शारीरिक और मानसिक दशाओं तथा
प्ररिवर्तनों का अध्यवन गर्भाधान से लेकर कृद्धाकस्था तक करता है।
Comments
Post a Comment