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Behaviour theory(व्यवहारवाद)

मानवतावादी सिद्धान्त के मनोवैज्ञानिकों ने मानव व्यवहार एवं पशु व्यवहार में सापेक्ष अंतर माना है। ये व्यवहारवाद का इसलिए खण्डन करते हैं कि व्यवहारवाद का प्रारम्भ ही पशु व्यवहार से होता है। मास्लो एवं उनके साथियों ने मानव व्यवहार को सभी प्रकार के पशु व्यवहारों से भिन्न माना। इसलिए उन्होंने पशु व्यवहार की मानव व्यवहार के साथ की समानता को अस्वीकार किया। उन्होंने मानव व्यवहार को समझने के लिए पशुओं पर किये जाने वाले शोध कार्यों का खण्डन किया क्योंकि पशुओं में मानवोचित गुण जैसे आदर्श, मूल्य, प्रेम, लज्जा, कला, उत्साह, रोना, हंसना, ईर्ष्या, सम्मान तथा समानता नहीं पाये जाते। इन गुणों का विकास पशुओं में नहीं होता और विशेष मस्तिष्कीय कार्य जैसे कविता, गीत, कला, गणित आदि कार्य नहीं कर सकते। मानवतावादियों ने मानवीय व्यवहार की व्याख्या में मानव के अंतरंग स्वरूप पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार व्यक्ति का एक अंतरंग रूप है जो कुछ मात्रा में उसके लिए स्वाभाविक, स्थाई तथा अपरिवर्तन्यील है। इसके अतिरिक्त उन्होंने मानव की सृजनात्मक क्रियाओं को व्यिष्ट क्रियाएं माना है। मास्लो तथा अन्य मानवतावादियों का यह विचार है कि अन्य सिद्धान्तों में मनोवैज्ञानिकों द्वारा मनुष्य के व्यवहार का अध्ययन करने में किसी ऐसे पक्ष का वर्णन नहीं किया, जो पूर्ण स्वस्थ मानव के प्रकार्य, जीवन पद्धति और लक्ष्यों का वर्णन कर सके। मास्लो का यह विश्वास था कि मानसिक स्वास्थ्य का अध्ययन किए बिना व्यक्ति की मानसिक दुर्बलताओं का अध्ययन करना बेकार है। मास्लो (1970) ने कहा कि केवल असामान्य, अविकसितों, विकलांगों तथा अस्वस्थों का अध्ययन करना केवल ‘विकलांग’ मनोविज्ञान को जन्म देना है। उन्होंने मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ एवं स्व-वास्तवीकृत व्यक्तियों के अध्ययन पर अधिक बल दिया। अतः मानवतावादी मनोविज्ञान में ‘आत्मपरिपूर्ण (Self-fulfillment) को मानव जीवन का मूल्य माना है।

अभिप्रेरणा के व्यापक रूप से चर्चित होने वाले सिद्धांतों में से एक अब्राहम मास्लो का सिद्धांत है।

सिद्धांत का सारांश इस तरह प्रकट किया जा सकता है:

मनुष्य की कुछ जरूरतें और इच्छाएं है जो उसके बर्ताव या आचरण को प्रभावित करती हैं। केवल पूरी न होनेवाली जरूरत ही व्यवहार को प्रभावित करती हैं, न कि पूरी हो जानेवाली जरूरत।चूंकि जरूरतें अनेक होती हैं इसलिए इनकी प्राथमिकता मूलभूत जरूरतों से लेकर जटिल तक, क्रमानुसार उनके महत्व के आधार पर तय होती हैं।निम्न स्तर की ज़रूरत अगर न्यूनतम संतुष्टि दे जाती हैं तो व्यक्ति अपनी अगली जरूरत की ओर कदम बढ़ाता है।पदानुक्रम की और ज्यादा प्रगति से एक व्यक्ति अधिक व्यक्तिपरकता, मानविकता और मनोवैज्ञानिक स्वस्थता दिखाएगा।

जरूरतों की सूची मूलभूत (बिलकुल निम्न) से लेकर सबसे जटिल तक इस प्रकार है:

शारीरिकसुरक्षातादात्मिकता या सम्बन्धआत्मसम्मानस्व प्रत्यक्षीकरण

शारीरिक जरुरत

शारीरिक ज़रूरत मानव अस्तित्व के लिए जरुरी आवश्यकताएं हैं। यदि ये आवश्यकताएं पूरी नहीं हुई हैं तो कोई भी मानव संभवतः उचित रूप से कार्य नहीं करेगा और वह अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकता। शारीरिक आवश्यकताओं को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है अतः इनकी पूर्ति सबसे पहले होनी चाहिए। मनुष्यों और सभी जानवरों में अपने जीवन को बनाए रखने के लिए वायु, पानी और भोजन आदि बुनियादी जरुरत है। इसके अतिरिक्त कपड़े, शरणस्थली व्यक्तियों को प्रकृति से सुरक्षा प्रदान करते हैं और मानव यौन व्यवहार जीवन दर को बनाए रखने के लिए भी परम आवश्यक मन गया है।
सुरक्षा जरुरत

प्रायः जब किसी व्यक्ति की शारीरिक ज़रूरतें अपेक्षाकृत पूरी हो जाती हैं, तो उनकी सुरक्षा की आगे आने लगती हैं और उनके व्यवहार में यह दिखाई पड़ने लगती हैं।

सुरक्षा और सुरक्षा की जरूरतों में शामिल हैं:

व्यक्तिगत सुरक्षावित्तीय सुरक्षास्वास्थ्य और भलाईदुर्घटना / बीमारी और उनके प्रतिकूल प्रभावों के खिलाफ सुरक्षा निवारण

तादात्मिकता या सम्बन्ध

शारीरिक और सुरक्षा आवश्यकता की पूर्ति के पश्चात मानव जरूरत के तीसरे स्तर पर तादात्मिकता या सम्बन्ध भावनाओं को शामिल किया जाता है। जिसे तीन भागों में बाँट सकते हैं-

दोस्तीपरिवारअंतरंगता या सामाजिक सम्बन्धमास्लो के अनुसार, मनुष्यों अपने सामाजिक समूहों के मध्य अपने सम्बन्ध की स्वीकृति की भावना महसूस करता है- भले ही ये समूह बड़े या छोटे हों। उदाहरण के लिए, कुछ बड़े सामाजिक समूहों में क्लब, सह-कार्यकर्ता, धार्मिक समूह, पेशेवर संगठन, खेल टीम और गिरोह शामिल हो सकते हैं।छोटे सामाजिक संबंधों के कुछ उदाहरणों में परिवार के सदस्यों, अंतरंग साझेदार, संरक्षक, सहकर्मियों और विश्वासपात्र शामिल हो सकते हैं। मनुष्य की आतंरिक चाह प्यार देने और प्यार करने की होती है, वह चाहता है की लोग उसे महत्त्व दें।

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