Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2019

Child development(बाल विकास)

बाल विकास .।.प्रस्तावना बाल्वकाल मानव जीवन की उत्यन्त महत्त्वपूर्ण अवस्था है। वह विकास काल भावी जीवन की आधारशिला प्रस्तुत करता है। अतः सभी मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाशास्त्रियों तथा दार्शनिकों ने इस अवस्था के महत्त्व को स्वीकार करते हुए । कि 6: इस बात पर जोर दिया है कि इस आयु में बालक का पालन-पोषण और शिक्षण इस प्रकार किया जाये कि वह समाज, समुदाय तथा राष्ट्र के उत्तम नागरिक के है रूप में विकसित हो सके। फ्रायड के अनुसार- प्राणी बार, पाँच साल वी उप्र में जो कुछ बनना होला है बर जाला है। अत्तः फ्रायड के अनुसार भी जीवन की प्रारम्भिक अवस्था महत्त्वपूर्ण अक्स्था है। कुछ समय पूर्व तक समाज की यह धारणा थी कि मानव शिशु शारीरिक रूप से प्रौढ“ों के समान ही होता है, जो कि विकास क्रम में धौरे-थौरे प्रौढो के रूप में परिवर्तित हो जाता है। व्यक्तियों की इसी धारणा के कारण बाल विकास तथा बाल मन के अध्ययन की आवश्यकता है। दार्शनिकों के प्रयासों से धीरे-धीरे काल अध्यदन और बाल विकास के महत्त्व को समझा जाने लगा, 2. जेम्स देवर के अनुसार- खाल मनौविज्ञन मनौविज्ञन की वह शाखा है, जो प्राणी क...

Behaviour theory(व्यवहारवाद)

मानवतावादी सिद्धान्त के मनोवैज्ञानिकों ने मानव व्यवहार एवं पशु व्यवहार में सापेक्ष अंतर माना है। ये व्यवहारवाद का इसलिए खण्डन करते हैं कि व्यवहारवाद का प्रारम्भ ही पशु व्यवहार से होता है। मास्लो एवं उनके साथियों ने मानव व्यवहार को सभी प्रकार के पशु व्यवहारों से भिन्न माना। इसलिए उन्होंने पशु व्यवहार की मानव व्यवहार के साथ की समानता को अस्वीकार किया। उन्होंने मानव व्यवहार को समझने के लिए पशुओं पर किये जाने वाले शोध कार्यों का खण्डन किया क्योंकि पशुओं में मानवोचित गुण जैसे आदर्श, मूल्य, प्रेम, लज्जा, कला, उत्साह, रोना, हंसना, ईर्ष्या, सम्मान तथा समानता नहीं पाये जाते। इन गुणों का विकास पशुओं में नहीं होता और विशेष मस्तिष्कीय कार्य जैसे कविता, गीत, कला, गणित आदि कार्य नहीं कर सकते। मानवतावादियों ने मानवीय व्यवहार की व्याख्या में मानव के अंतरंग स्वरूप पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार व्यक्ति का एक अंतरंग रूप है जो कुछ मात्रा में उसके लिए स्वाभाविक, स्थाई तथा अपरिवर्तन्यील है। इसके अतिरिक्त उन्होंने मानव की सृजनात्मक क्रियाओं को व्यिष्ट क्रियाएं माना है। मास्लो तथा अन्य मानवतावादियों का यह वि...

Study

Study of Blood -. haematology Study of Liver -. Hepatology Study of fungi -. Mycology Study of Algae .. Phycology Study of Virus -. Virology Study of Kidney .. Nephrology Study of Cancers -. Oncology Study of Universe -. Cosmology Study of Fruits -. Pomology Study of Birds -. Ornithology Study of Bones -. Osteology Study of Egg -- Oology Study of Dream -. Oneirology Study of Hair -. Trichology Study of Eyes .. Opthalmology Study of Soil -. Pedology Study of Languages -. Philology Study of Brain .. Encephlology Study of Nails -. Cosmetology Study of Air -. Aerology Study of Earth .. Geology

Simple interest Questions And answer

साधारण ब्याज साधारण ब्याज = (मूलधन x समय x दर) / १०० दर = ब्याज x 100 / (मूलधन x समय) समय = ब्याज x 100 / (मूलधन x दर) मूलधन = ब्याज x 100 / (समय x दर) उपरोक्‍त सूत्राो का एक सूत्र में भी कार्य किया जा सकता है , जिससे दर,समय और साधारण ब्‍याज तीनो निकाल सकते है मूलधन x दर x समय = 100 x साधारण ब्याज मिश्रधन = मूलधन + ब्याज या, मिश्रधन = मूलधन x (1 + समय x दर / 100) चक्रवृद्धि ब्याज उपरोक्त सूत्र का प्रयोग करने के लिये, P = 1500, r = 4.3/100 = 0.043, n = 4, एवं t = 6: {\displaystyle A=1500(1+{\frac {0.043}{4}})^{4*6}=1938.84} अतः ६ वर्ष बाद मिश्रधन लगभग रू 1,938.84 होगा। उपरोक्त सूत्र को अलग प्रकार से लिखकर ब्याज-दर, समय, या मूलधन (अथवा वर्तमान मान) की गणना की जा सकती है। नीचे के सूत्रों में  i  ब्याज दर है और इसे वास्तविक प्रतिशत (true percentage) के रूप में लेना है। (अर्थात् 10% = 10/100 = 0.10).  FV  एवं  PV  क्रमशः भविष्य की राशि एवं वर्तमान राशि हैं।  n  कुल ब्याज-चक्रों की संख्या है। भविष्य में मान , {\displaystyle FV=PV(1+i...